December 17, 2008

चौतरफा मंदी फ़िर भी भारत में रोज़गार के बढ़ते अवसर


23/दिसम्बर/2008/(कमल सोनी)>>>> जहाँ एक और आर्थिक मंदी के कारण पूरे विश्व में नौकरियों में कटौती की जा रही है वहीं भारत में रोज़गार के अवसर बढ़ रहे है देश में चाहे बैंकिन सेक्टर हो, बीम क्षेत्र हो, बी.पी.ओ. या फ़िर टेलीकाम जगत चाहे शासकीय नौकरी हर क्षेत्र में नौकरी की संभावनाएं बढ़ रही हैं हा क्षेत्र में उर्जावान, और टेलेंटेट युवाओं की मांग बढ़ रही है यहाँ आपको एक ख़ास बात बताना आवश्यक हो जाता है की रोज़गार ने नज़रिए से भारत दुनिया के तीन सबसे बेहतर देशों में शुमार है यही मुख्या कारण है की जहाँ दुनिया के दूसरे देशों में नौकरी में कटौती की जा रही है तो दूसरी और भारत में नै नौकरियों में भर्ती की जा रही है अब एक सवाल हम सभी के ज़हन में आता है की "आखिर भारत में ही इतनी भर्तियाँ क्यों?" जी हाँ पूरी दुनिया में नौकरियों में भारी मात्रा में कटौती की गई इसके उल्टे भारत में निजी और शासकिये दोनों ही तरफ़ से नै नौकरियों की भर्ती की घोषणा की गई
इसका मुख्य कारण है :- <*> कम लागत के कारण विदेशी कंपनियों के लिए बचत के स्त्रोत मौजूद हैं <*> भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास डर सात से आठ फीसदी का होना <*> कुशल, उर्जावान और कंपनी के प्रति समर्पित कर्मचारी <*> बाज़ार के धीमेपन का कंपनी के कामकाज पर ज्यादा असर नहीं होना <*> नए अवसरों की उपलब्धता
भारत की कई नामी और बड़ी कंपनियों ने ख़ुद छटनी की संभावना से इनकार करते हुए नै नौकरियां देने की घोषणा की है अनिल धीरुभाई अम्बानी ने छटनी की बातों को दरकिनार कर अगले कुछ माह में ९०००० नौकरियों के अवसर देने की घोषणा की है दूसरी और दूरसंचार क्षेत्र की कंपनी एल्काटेल ल्यूसेंट १००० नई भर्ती करने जा रही है इसके अलावा भारतीय स्टेट बैंक ने भी बड़े पैमाने पर भर्ती की घोषणा की है हाल ही में बैंकिंग सेक्टर के एक के बाद एक घोषणाये करने के बाद देश में युवाओं में उत्साह भर दिया है इसके बाद बीमा जगत का नंबर आता है
रोज़गार के दृष्टिकोण से भारत में बढ़ती संभावनाओं के चलते वे कंपनियाँ जो दुनिया के दूसरे देश में छटनी कर रही हैं वे ही भारत में अपनी कंपनियों में नई भर्ती कर रही हैं एक मैन पावर कंपनी के सर्वे के अनुसार लगभग १९ % कंपनियों को अगले वर्ष की पहली तिमाही में रोज़गार में बढोत्तरी की उम्मीद है
किस क्षेत्र में हैं रोज़गार की कितनी संभावनाएं :-


2 comments:

अनुनाद सिंह said...

यह वैश्विक मंदी भारत के लिये वरदान साबित हो सकती है यदि देश की जनता, नेता और उद्योगपति साहस और बुद्धिमता दिखायें। देश एक छलांग लगअकर अग्रणी राष्ट्रों की पंक्ति में पहुँच सकता है।

आवश्यकता है कि हम आशावान बने रहें, सूझबूझ से काम लें, नये-नये रास्ते निकालें, नवाचार को बढावा दें॥।

हेमंत said...

Rethink regarding your post. According to Labour Ministry 6,55,000 people have lost their job since August to October. If one want to see worst situation wait for election........