February 28, 2009

अब मध्यप्रदेश के चार बड़े शहरों में चलेंगी एयर कंडीशन वोल्वो सिटी बस

<><><>(कमल सोनी)<><><> मध्यप्रदेश के चार बड़े शहरों में एयर कंडीशन वोल्वो सिटी बसे चलाई जायेंगी यदि सब कुछ ठीक ठाक चला तो आगामी तीन चार माह में एयर कंडीशन वोल्वो सिटी बसे प्रदेश के चार बड़े शहरों की सडकों में दौडेंगी नगरीय प्रशासन मंत्र बाबूलाल गौर ने भोपाल में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बात कही उन्होंने बताया कि जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीनीकरण मिशन के अंतर्गत विभिन्न परियोजनाओं की स्वीकृति हेतु पर्यवेक्षण समिति की एक बैठक दिनांक २६/०२/2009 को आहूत की गई थी जिसमें प्रदेश के चार बड़े शहरों इंदौर, भोपाल, जबलपुर और उज्जैन के लिए कुल ५२५ एयर कंडीशन वोल्वो सिटी बसे स्वीकृत हो गई हैं
बाबूलाल गौर ने बताया कि इन बसों के लिए लगभग ५० प्रतिशत भारत सरकार का अनुदान है तथा २० प्रतिशत प्रदेश सरकार से अनुदानित होगा तथा ३० प्रतिशत हिस्सा बस आपरेटरों को लगाना होगा प्रदेश के लिए स्वीकृत कुल ५२५ बसों की लागत २०५ करोड़ रु है इससे पूर्व भी प्रदेश के चार शहरों में स्टार सिटी बसे संचालित हैं जिनमें बसे बस आपरेटरों ने ख़रीदी थी लेकिन इस बार ऐसा नहीं है दूसरी तरफ बसों के लिए आपरेटर के चयन के लिए अगले एक सप्ताह के भीतर निविदाएँ आमंत्रित किये जाने की भी खबरें हैं उमीदें लगाईं जा रही हैं कि आगामी चार पांच माह के भीतर ये बसे प्रदेश के चार नादे शहरों की सडकों पर दौड़ती नज़र आयेंगी हलाकि आगामी लोक सभा चुनाव के मद्देनज़र आचार संहिता लग जाने से विभागीय कर्यप्रानाली में किसी अड़चन से भी इनकार नहीं किया जा सकता
तीन तरह की होंगी बसे :- नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि ये बसे कुल तीन तरह की होंगी
लो फ्लोर ऐ.सी. - लागत ७० लाख
लो फ्लोर नॉन ऐ.सी. :- लागत ४० लाख
स्टैण्डर्ड :- ३० लाख
प्रदेश में कुल ५२५ बसें खरीदे जायेंगी कुल लागत ---- २०५ करोड़ रुपये
कहाँ कितनी बसे :-
१ > राज़धानी भोपाल
लो फ्लोर ऐ.सी --- ५० बसे
लो फ्लोर नॉन ऐ.सी. --- ५० बसे
स्टैण्डर्ड --- १२५ बसे
कुल बसे ------- २२५
२ > इंदौर
लो फ्लोर ऐ.सी --- २० बसे
लो फ्लोर नॉन ऐ.सी. --- ३० बसे
स्टैण्डर्ड --- १२५ बसे
कुल बसे ------- १७५
३ > जबलपुर
लो फ्लोर ऐ.सी --- २५ बसे
स्टैण्डर्ड --- ५० बसे
कुल बसे ------- ७५
४ > उज्जैन
लो फ्लोर ऐ.सी --- १० बसे
स्टैण्डर्ड --- ४० बसे
कुल बसे ------- ५०
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February 27, 2009

बढ़ रहा है वन्य प्राणयों को गोद लेने का सिलसिला

<><><>(कमल सोनी)<><><> वन वहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल में वन्य प्राणयों को गोद लेने का सिलसिला जारी है। नव वर्ष से प्रारंभ वन्य प्राणी एडाप्शन योजना के तहत मध्यप्रदेश स्टेट माइनिंग कारपोरेशन लिमिटेड, भोपाल वन विहार की मादा बाघ श्वेता को गोद लेकर प्रदेश का पहला उपक्रम बन गया है। वन विहार में मादा बाघ श्वेता एवं उद्यान में मौजूद एकमात्र रेटल (भू-रीछ) को गोद लिया गया है। इसके अलावा भोपाल निवासी जैन दंपत्ति द्वारा रेटल (भू-रीछ) को गोद लिया गया है।
मध्यप्रदेश स्टेट माइनिंग कारपोरेशन लिमिटेड, भोपाल द्वारा एक वर्ष के लये वन विहार की मादा बाघ को उसके ऊपर एक वर्ष में होने वाले व्यय की राशि एक लाख 22 हजार रुपये की प्रतपूर्ति कर गोद लया गया है। इसी प्रकार भोपाल निवासी श्रीमती संध्या एवं श्री पुष्पेन्द्र जैन द्वारा वन विहार के एकमात्र रेटल (भू-रीछ) को गोद लिया गया है। इस वन्यप्राणी पर तीन माह में होने वाले व्यय दो हजार, 400 रुपये राशिः की प्रतपूर्ति उनके द्वारा की गई है। जैन दम्म्पत्ति रेटल को गोद लेने वाले प्रथम दम्म्पत्ति हैं।
गौरतलब है कि आमजनमानस में वन्य जीवों के संरक्षण के प्रति जागरूकता लाने यह योजना इसी वर्ष पहली तारीख को प्रारंभ की गई थी
कौन कौन है वन्य प्राणियों के अभिभावक :- वन विहार में रह रहे वन्य प्राणियों को गोद लेने की योजना गत एक जनवरी से शुरू हुई है। पहले ही दिन आईएएस अफसर अशोक दास की बेटी अभिनीता दास ने एक अजगर को गोद लिया था। अभिनीता देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर में कानून की पढ़ाई कर रही हैं। उन्होंने इंटर्नशिप की पहली किस्त मिलने पर अजगर को गोद लिया था। इसके बाद पानीपत के राकेश गुगलानी ने ही १० जनवरी को अजगर को ही आगामी छः माह के लिए गोद लिया था इसी कड़ी में उद्योगपति गुलरेज अहमद ने वन विहार के एक बाघ को गोद लिया उन्होंने तीन महीने के लिए बाघ को गोद लिया और इसके एवज में वन विहार प्रबंधन को 36 हजार रुपए दिए । गत 28 जनवरी को भोपाल नवासी श्री मति मीना गुप्ता मीना गुप्ता एवं श्री एम.के. गुप्ता द्वारा संयुक्त रूप से विहार के एक पेंथर को गोद लिया गया है। इसके अलावा इस योजना के तहत वन विहार के मगर को महाराष्ट्र निवासी अनिल कुमार तनवाणी ने गोद लिया है। उन्होंने वन वहार के वन्यप्राणी मगर के ऊपर एक माह में होने वाले व्यय 3600 रुपये राशि की प्रतपूर्ति कर गोद लिया है।
क्या है योजना ? :- आमजनमानस में वन्य प्राणियों और प्रकृति के प्रति स्नेह और उनके संरक्षण के लिए जागरूकता बढाने के लिए वन विहार ने एक नई योजना प्रारंभ की है और वह है वनविहार में रह रहे वन्य प्राणियों को गोद लेने की योजना इस योजना के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति वन विहार में रह रहे जानवरों को गोद ले सकेगा वन विहार में बाघ, सिंह, तेंदुआ, भालू, लकड़बग्घा, भू.रीछ, सियार, मगर, घड़ियाल, अजगर, सर्प को गोद ले सकता है गोद लेने वाला व्यक्ति वार्षिक, अर्धवार्षिक, त्रैमासिक अथवा मासिक आधार पर इन्हें गोद ले सकता है वन्य प्राणियों को गोद लेने के लिए भुगतान की गई राशि को आयकर की धारा ८० जी. के तहत आयकर से पूर्णतः मुक्त रखा गया है
ये भी हैं फायदे :- वन्य प्राणी एडाप्शन योजना के तहत वन विहार में रह रहे किसी भी वन्य प्राणी को गोद लेने पर भुगतान की गई राशि आयकर की धारा 80 जी के प्रावधानों के अंतर्गत छूट के दायरे में आती है। इसके साथ ही गोद लेने वाले को हर महीने पांच बार वन विहार में अधकतम छह सदस्यों को एक वाहन के साथ निशुल्क आने की पात्रता होगी, जिससे वे अपने गोद लिए वन्यप्राणी को देख सकेंगे।
वन विहार में आयेगा सफेद शेर का जोड़ा :- भोपाल स्थित वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में सफेद शेर का एक जोड़ा उड़ीसा के नंदन कानन चिडिया घर से लाया जाएगा। इस बात की जानकारी वन, जैव विविधता एवं जैव प्रौद्योगकी, खनज संसाधन, विधी एवं विधायी कार्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री राजेन्द्र शुक्ल ने दी। उन्होंने विभाग को हिदायत दी है कि रीवा का जंगल सफेद शेर की जन्मस्थली है। वहां एक सफारी पार्क बनाया जाये। उन्होंने नंदन कानन चिडिया घर का निरिक्षण कर वन विहार के लिए सफ़ेद शेर भगत एवं शेरनी ललिता को भी देखा। ये दोनों सफेद शेर वन विहार को उपलब्ध कराने के लिए केन्द्रीय चिडिया घर प्राधिकरण से अनुमति मांगी गई है वन वहार इसके बदले जंगल से लाई गई एक शेरनी सारा एवं सियार का एक जोड़ा नंदन कानन चिडिया घर को उपलब्ध कराएगा।

February 24, 2009

मध्यप्रदेश के इंदौर में 28 फरवरी को रिवर्स वायर सेलर्स मीट का आयोजन - आप भी हैं आमंत्रित |

<><><>(कमल सोनी)<><><> हस्त शिल्प और हथकरघा उद्योग से जुड़े लोगों के लिए यह एक अच्छी खबर है आगामी 28 फरवरी और 1 मार्च को इन्दोर में रिवर्स वायर सेलर्स मीट का आयोजन स्थानीय होटल फॉरच्यून लैंडमार्क में किया जा रहा है जहाँ पूरे मध्यप्रदेश से हस्त शिल्प और हाथ करघा उद्योग से जुड़े लोग एक साथ एक मंच पर एकत्र होंगे हस्त शिल्प और हाथ करघा उद्योग से जुड़े लोगों में जहाँ एक और शीपी बुनकर होंगे तो वहीं दूसरी और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खरीददार, निर्यातक, डीलर और वितरक भी भारी संख्या में मौजूद रहेंगे इस आयोजन का उद्देश्य मध्यप्रदेश के हस्त शिल्प और हथकरघा व्यवसाय से जुड़े लोगों को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाना तथा अंतरराष्ट्रीय व्यावसाइयों से सीधे उनका संवाद कर उनकी पसंद, बदलते तौर तरीकों, विदेशी बाज़ार की ज़रूरतों तथा अंतर्राष्ट्रीय मानकों से अवगत कराना है ताकि मध्यप्रदेश हस्त शिल्प और हथकरघा कला को प्रोत्साहन मिले तथा इस परम्परा को जीवीत भी रखा जा सके रिवर्स वायर सेलर्स मीट में अंतर्राष्ट्रीय कला व्यवसाई और खरीददार भी प्रदेश में उपलब्ध कौशल और कला से परिचित होने का मौका मिलेगा
ये हैं आमंत्रित :- रिवर्स वायर सेलर्स मीट में फ्रांस, मलेशिया, स्पेन, लेबनान, स्विट्जरलैंड, यूंएसऐ, पोलेंड, ब्राजील, साउथ अफ्रिका, अर्जेन्टीन के करीब २९ ग्राहक आमंत्रित किये गए हैं इसके अलावा भारत से ४ बाइंग एजेंट भी इस मीट में शामिल होंगे इन सबके अलावा ऐसे निर्यातक और डीलर भी शामिल होंगे जो हस्त शिल्प और हथकरघा उत्पादों को विदेशों में निर्यात करते हैं इसके अलावा देश के औधोगिक घरानों जैसे बिग बाज़ार, शापर्स स्टाप, रिलाइंस, वेस्ट साइड फेब इंडिया और मदर आर्थ जैसे कई संस्थाओं को आमंत्रित किया गया है
क्या होगी मीट की रौनक :- प्रदेश में आयोजित होने वाली अपने ही तरह के पहली मीट में चंदेरी, माहेश्वरी, बाघ प्रिंट्स, वारासिवनी के सूतीवस्त्र, चादर, परदे, चमडे के उत्पाद, खिलौने, जूट के उत्पाद, चातारपुर के कलात्मक फर्नीचर, बांस के फर्नीचर, बेलमेटल, सिरेमिक्स, पत्थर की कलाकृतियाँ, ग्वालियर के गलीचे, कलात्मक ज्वेलरी, तथा बुटिक उत्पाद मीट की रौनक बढायेंगे
बहरहाल नई नई तकनिकी आती रही लेकिन हस्त शिल्प कला का जादू कभी कम नहें हुआ हलाकि बदलते परिवेश और नई सोच इन्हें पतन की और ले जा रहा है ऐसे में रिवर्स वायर सेलर्स मीट प्रदेश के शिल्प कारीगरों और शिल्प व्यावसाय में नई जान फूंकने का काम ज़रूर कर सकता है आने वाले समय में ऐसे आयोजन का होना बेहद आवश्यक है ताकि हमारे देश और संस्कृति की पहचान इस क़ला को सदियों तक जीवंत रख सकें और आने वाली पीढी को भी इसे जीवित रखने के लिए प्रेरित कर सकें

स्लमडॉग मिलिनियर - थोड़ी खुशी थोडा गम |

<><><>()<><><> स्लमडॉग मिलिनियर को मिले आठ आस्कर अवार्ड्स से एक तरफ भारत का कला जगत आज राहत महसूस कर रहा है लम्बी जद्दोजहत के बात तीन ऑस्कर तो भारत की झोली में आये लेकिन मीडिया और कला जगत से जुड़े कुछ लोगों इस बात की कतई खुशी नहीं हैं इस बीच इस बात की बहस भी छिड़ गई कि स्लमडॉग मिलिनियर हॉलीवुड की फिल्म है दूसरा कई लोगों को इस बात का मलाल भी है कि इस फिल्म में कहीं न कहीं देश का उपहास किया गया लेकिन इस बहस का क्या ? क्या वास्तविकता दिखाना भी कोई मज़ाक है यदि इस फिल्म को हमारे देश के निर्माता और निर्देशक ने बनाया होता तो क्या तब भी हम यही कहते कि इस फिल्म में देश का उपहास उडाया गया है इससे तो यही पता चलता है कि हम सच्चाई को स्वीकारने से डरते है और नकारने में आगे हैं स्लमडॉग मिलिनियर को मिले आठ पुरस्कारों में से तीन भारत की झोली में भी आये तो देश भर में एक और बहस छिड़ गई कि भारतीय फिल्मो को पहले कभी ऑस्कर क्यों नहीं मिला लेकिन एक ख़ास बात जो मेरे दिल में है वह यह कि भारत का संगीत विश्व में सबसे आगे है यहाँ का अभिनय कौशल भी विश्व में सबसे आगे है भारत में ऐसी कई फिल्में बनी जिन्हें ऑस्कर दिया जाना चाहिए हो सकता है वो फिल्में ऑस्कर के लिए निर्धारित मापदंडों पर भले ही खरी न उतरी हों यह भी संभव है कि शायद किसी भेदभाव की भावना के चलते भारतीय फिल्मो को ऑस्कर न दिया गया हो लेकिन भारतीय कला जगत पुरस्कारों का मोहताज़ नहीं क्या कला को भी पुरस्कारों के तराजू में तौलकर उसे नंबर वन या नंबर दो की पोजीशन पर बैठाना उचित है यह हमारी परंपरा भी नहीं है हम तो बेवजह इस विदेशी पुरस्कार को हासिल करने की जद्दोजहद में जुटे हैं जो हमारे पाश्चात्य सभ्यता की और बढ़ रहे रुझानों को भी दर्शाता है हाँ फिर भी भारतीय फिल्म निर्माता और निर्देशक चाहें तो ऐसा नहीं हैं कि भारतीय फिल्में ऑस्कर अवार्ड नहीं जीत सकती लेकिन अब वालीवुड से जुड़े फिल्म निर्माताओं और निर्देशकों को यह सोचना होगा कि वे दर्शकों के सामने क्या परोस रहे हैं वालीवुड को आज ज्यादा बड़े बजट की फिल्म बनाना ही नहीं बल्कि ऐसे फिल्मो का निर्माण करना चाहिए जिनका कोई स्तर हो

February 21, 2009

मध्यप्रदेश: शिवराज ने शुरू किया कोयला सत्याग्रह - केन्द्र पर लगाए सौतेले व्यवहार का आरोप

<><><>(कमल सोनी)<><><>मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केन्द्र सरकार प्र सौतेले व्यवहार का आरोप लगाते हुए कोयला सत्याग्रह की शुरूआत की है मुख्यमंत्री के इस कोयले सत्याग्रह को आगामी लोकसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है मुख्यमंत्री ने कोयला सत्याग्रह के दौरान प्रदेश बीजेपी कार्यालय में अपनी पहली सभा में ही एक बार वीर विदेशी मूल का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जिस पार्टी का नेता ही विदेशी हो वो इस देश की जनता का दर्द क्या जानेगी
प्रदेश बीजेपी कार्यालय में दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्होंने इस सत्याग्रह की शुरुआत की उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस हमें चुनाव में नहीं हरा पाई तो अब बेईमानी करके बीजेपी को हराना चाहती है अपने संबोधन में उन्होंने रेल बजट लो लालू प्रसाद यादव के घर का बजट करार दिया मध्यप्रदेश की बिजली समस्या पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में पन बिजली उत्पादन के बारे में बताते हुए कहा कि पहले हम ३१०० मेगावाट बिजली का उत्पादन कर लेते थे लेकिन अभी हमारे प्रदेश के सारे बाँध खाली है यही वजह है कि हमारा बिजली उत्पादन घटाकर ३५० मेगावाट रह गया है ऐसे में हम कोयले से बिजली उत्पादन के सयंत्रों बिरसिंगपुर, अमरकंटक, और सारणी पर ही आश्रित है उन्होंने कहा कि हमें बिजली उत्पादन के लिए १७.१ लाख मिलियन टन कोयले की आवश्यकता है लेकिन केन्द्र ने सिर्फ़ १३.५ लाख मिलियन टन कोयले का आवंटन किया और सिर्फ़ ११ लाख मेट्रिक टन कोयला हमें दे रही है और वह भी लो ग्रेट का यही वजह है कि हम पर्यात बिजली उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं और प्रदेश में बिजली संकट गहराता जा रहा है मुख्यमंत्री ने आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस जान बूझकर प्रदेश में बिजली संकट लाना चाहती है ताकि वह अपनी वोटों की फसल काट सके
न्याय यात्रा पर निकलें शिवराज :- पहले चरण में वाहनों के जरिए भोपाल से इटारसी तक होने वाली इस यात्रा के दौरान मार्ग में जगह-जगह मुख्यमंत्री का स्वागत किया जाएगा और जनसभाएं होंगी। यात्रा प्रभारी रामेश्वर शर्मा ने प्रदेश कार्यालय में जिले के नेताओं की बैठक कर यात्रा से जुड़ी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सौंपी। शर्मा के अनुसार यात्रा 21 और 22 फरवरी को ग्रामीण अंचल से होती हुई सारणी पहुंचेगी, जहां से मुख्यमंत्री पाथाखेड़ा कोयला क्षेत्र तक पैदल यात्रा करते हुए पहुंचेंगे और सत्याग्रह करेंगे।
पत्नी साधना भी होंगी साथ में :- मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के साथ उनकी पत्नी साधना सिंह भी कोयला सत्याग्रह में भोपाल से पथाखेदा तक साथ रहेंगी सत्याग्रह की शुरुआत में उन्होंने कहा कि हमारे प्रदेश के साथ जो अन्याय हो रहा है उस अन्याय के ख़िलाफ़ में अपने पति के साथ हूँ
न्याय यात्रा के दौरान जनसभाएं :- 21 फरवरी को साढ़े 12 बजे मंडीदीप, डेढ़ बजे औबेदुल्लागंज, तीन बजे बुधनी में, साढ़े चार बजे होशंगाबाद शाम साढ़े छह बजे इटारसी में जनसभा होगी। न्याय यात्रा रात्रि में इटारसी में विश्राम करेगी। 22 फरवरी को इटारसी से यात्रा शुरू होगी और शाहपुर, चौपना, सारणी स्टेडियम में मुख्यमंत्री की जनसभा होगी। इसके बाद वे पदयात्रा कर सात किमी दूर पाथाखेड़ा जाएंगे और कोयला उठाएंगे।
नियामक आयोग बनाने की मांग :- मुख्यमंत्री ने केन्द्र और राज्य सरकारों के परस्पर संबंधों को परिभाषित करते हुए कोयला आवंटन के लिए नियामक आयोग बनने की मांग भी की है
मुख्यमंत्री के इस कोयला सत्याग्रह की शुरुआत में प्रदेश बीजेपी कार्यालय में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, विक्रम वर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री सुन्दरलाल पटवा, कैलाश जोशी, बिजली मंत्री अनूप मिश्रा, सहित पार्टी के कई नेता और प्रदेश सरकार के मंत्री मौजूद थे
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February 17, 2009

अब तन्हा बाघ के लिए दुल्हन लाने की तैयारी

<><><>(कमल सोनी)<><><> मध्य प्रदेश के पन्ना बाघ अभयारण्य में जिन्दगी का सफर तन्हा गुजार रहे एक बाघ को जल्द ही बाघिन का साथ मिल जाएगा। लंबी तलाश के बाद इस बाघ के लिए जीवन साथी ढूंढ ली गई है। पन्ना बाघ अभयारण्य में रह रहे बाघ की दुल्हन है रानी और इस बाघिन का मायका है बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व बांधवगढ़ बाघ अभयारण्य से बाघिन रानी को वायुसेना के हेलीकाप्टर से पन्ना लाया जाएगा। भारतीय वन्यजीव संस्थान डब्ल्यूआईआई की गणना में पन्ना बाघ अभयारण्य में बाघों की संख्या आठ बताई गई थी, लेकिन कुछ बाघ विशेषज्ञों ने यहां सिर्फ एक बाघ की मौजूदगी बताई है ऐसी स्थिति में इसके अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा था कि पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में बाघों को आबाद करने के लिए दूसरी जगह से प्रजनन क्षमता वाली बाघिन यहां लायी जाए। इस प्रयोग में बाघिन को नये माहौल में ढालने के लिए कुछ दिन तक उसे इसी घेरे में रखा जाएगा इसके लिए जिस बाड़े में उसे रखा जायेगा उसका भी काम लगभग पूरा हो चुका है और फिर माहौल में रच-बस जाने के बाद उसे रेडियो कालर पहनाकर जंगल में खुला छोड़ दिया जाएगा जिससे उसका बाघ से मिलन हो सके।
रखी जा रही है बाघिन पर निगरानी :- बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में रह रही बाघिन पर सतत निगरानी रखी जा रही है हाथी पर गश्त करते दल प्रतिदिन बाघिन पर नज़र रखे हुए हैं इस अभियान में टाइगर रिजर्व की भुमिका बाघिन को पकड़वाकर उसे हैलीकाफ्टर तक भिजवाने की है
सजेगी डोली :- पन्ना वन रियासत की नई रानी की डोली सजाने की तैयारी भी जोरों पर है बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से रवाना होकर यह डोली पाना बाघ अभ्यारण्य पहुंचेगी ख़ास बात यह है कि इस अभिनव प्रयोग के हर पल को कैमरे में कैद किया जायेगा खबर तो यह भी हैं कि पन्ना राष्ट्रीय पार्क प्रबंधन इसके लिए कॉपी राइट्स भी बेचने जा रहा है सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वन विभाग आगामी २५ फरवरी से २८ फरवरी के बीच यह प्रयोग करेगा बाघिन की डोली सजाने के लिए वायु सेना से हैलीकाफ्टर भी माँगा गया है साथ ही बाघिन को पहनाया जाने वाला रेडियो कॉलर भी विदेश से मंगाया जा रहा है
बहरहाल बाघों की घटती संख्या बेहद चिंताजनक है वन विभाग को आगामी समय में ऐसे और भी प्रयोग करने होंगे ताकि तेज़ी से घाट रही बाघों की संख्या पर रोक लगाईं जा सके और किसी तरह इनकी संख्या में बढोत्तरी की जा सके इससे पूर्व भी वन विहार भोपाल ने भी आम जनमानस में वन्य प्राणियों और प्रकृति के संरक्षण के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से वन्य प्राणी एडाप्शन योजना शुरू की थी जो कि बेहद लोकप्रिय भी हो रही है इसके बाद वन विहार का यह कदम निश्चित रूप से प्रशंसनीय है

February 13, 2009

आओ मनाएँ प्रेम दिवस


<><><>(कमल सोनी)<><><> आज फिर आया है खिलती बहारों का मौसम। आज फिर अँगड़ाई ले रही हैं तमन्नाएँ । आज फिर याद आ रही है उस पहली नजर के पहले-पहले प्यार की। इन्द्रधनुषी रंगों से दमकती शाम की। गुलाब सी महकती उन रंग बिरंगी यादों की। आज, बस आज, क्यूँ ना कह डाले हम अपने दिल की बात। कौन युवा दिल अपने को रोक पायेगा
कौन कहता है कि मोहब्बत की जुबाँ होती है
ये हकीकत तो निगाहों से बयाँ होती है।
जी हाँ वेलेंटाइन दे यानि प्रेम दिवस वैसे तो यह दिन हर उम्र वर्ग के व्यक्तियों के लिए लेकिन इस दिन को लेकर सबसे ज़्यादा उत्साह होता हैं युवा पीढी में आज हर दिल धड़क रहा है प्यार के इज़हार के लिए प्यार एक सुहाना अहसास है। साथ ही मन की सबसे प्रभावशाली प्रेरणा भी है। दुनिया में ऐसा कोई भी नहीं जो इस खुशनुमा एहसास से अछूता हो प्यार के बारे में सदियों से बहुत कुछ लिखा पढा और कहा जाता रहा है लेकिन फिर भी प्यार एक अबूझ पहेली रहा हैं तभी तो इसे समझ पाने में भूल हो जाती है सिर्फ इसीलिये क्योंकि वास्तव में इसे शब्दों में बयाँ कर पाना हर किसी के बस की बात नहीं 14 फरवरी एक ऐसा दिन है जो प्रेमियों के लिए सभी त्योहारों से भी बढ़कर है। इस दिन उनका जीवन अपने वेलेंटाइन के प्यार की सतरंगी रोशनी से जगमगा उठता है और हल्की मीठी सर्दी की तरह सुस्त पड़े जीवन में गुनगुनी धूप की तरह प्यार की दस्तक लेकर आता है।
प्यार वास्तव में किसी के प्रति त्याग और समर्पण की प्रवृत्ती है इसमें किसी प्रकार की अपेक्षा और स्वार्थ नहीं रह जाता प्यार तभी प्यार कहा जा सकता है जब उसमें पवित्रता, संवेदना, त्याग, गहराई, साधना, श्रद्धा, और विश्वसनीयता हो प्यार को सच और झूठ के तराजू में भी नहीं तौला जा सकता प्यार हमेशा झुकना सिखाता है बुराई से लड़ने को प्रेरित करता है सदा आगे बढ़ने का मार्ग दिखाता है प्रेम का यह पर्व वेलेंटाइन डे महज प्रेम करने या फिर सिर्फ एक त्यौहार की तरह मना लेने का ही अवसर नहीं है बल्कि प्रेम को समझने का वाला दिन है। वेलेंटाइन-डे भले ही पश्चिम से आया है, जिसकी परिणिति में विरोध के स्वर निकल रहे हैं। लेकिन हम उस देश के वासी हैं जहाँ राधा कृष्ण के अमर प्रेम की पूजा की जाती है हाँ महज़ कुछ मिथ्यावादी लोगों के कारण प्यार को ही पूरी तरह से नकारना या फिर उसे धर्म और संस्कृति के खिलाफ बताना भी उचित नहीं है
क्यों मनाया जाता है वेलेंटाइन डे :- रोम में तीसरी शताब्दी में सम्राट क्लॉडियस का शासन था। उसके अनुसार विवाह करने से पुरूषों की शक्ति और बुद्धि कम होती है। उसने आज्ञा जारी की कि उसका कोई सैनिक या अधिकारी विवाह नहीं करेगा। संत वेलेंटाइन ने इस क्रूर आदेश का विरोध किया। उन्हीं के आह्वान पर अनेक सैनिकों और अधिकारियों ने विवाह किए। आखिर क्लॉडियस ने 14 फरवरी सन् 269 को संत वेलेंटाइन को फाँसी पर चढ़वा दिया। तब से उनकी स्मृति में प्रेम दिवस मनाया जाता है।
संत वेलेंटाइन की स्मृती में मनाया जाने वाले प्रेम दिवस पर बांटे प्यार और खुशियाँ प्यार वो दौलत है जो बांटने से बढ़ती है जितना प्यार बांटोगे उतना प्यार पाओगे नफरत को सिर्फ प्यार से ही जीता जा सकता है प्रेम दिवस सिर्फ जवान दिलों की धड़कन ही नहीं क्योंकि प्यार के तो कई रूप होते हैं प्यार के हर रूप में उसका अलग रंग, अलग ही महक होती तो मनाएँ प्रेम दिवस, बांटे खुशियाँ और प्यार ..................
हैप्पी वेलेंटाइन डे

February 12, 2009

वेलेंटाइन डे हाई अलर्ट - साल भर बाद फिर जागे धर्म के रखवाले - भाई बहन के लिए जारी हो विशेष परिचय पत्र

<><><>(कमल सोनी)<><><> क्या आपका कोई प्रेम प्रसंग तो नहीं ? और क्या आप वेलेंटाइन डे पर कहीं डेट पर जाने का प्लान तो नहीं बना रहे ? तो हो जाइए सावधान क्योंकि साल भर बाद फिर जाग गए हैं धर्म और संस्कृति के रखवाले ऐसे में अपना वेलेंटाइन डे एक दिन पहले या फिर एक दिन बाद मनाना ज़्यादा बेहतर होगा वेलेंटाइन डे की सुगबुगाहट होते ही देश में धर्म के रखवाले एक बार फिर जाग गए और वेलेंटाइन डे जाते ही फिर एक साल के लिए सो जायेंगे पूरे साल इन्हें देश में कहीं अश्लीलता नहीं दिखती
ये धर्म और संस्कृति के रखवालों ने कसम खा रखी है देश के प्रेमी प्रेमिकाओं के संस्कार सिखाने की और ये सब वो मान सम्मान और संस्कारों को ताक पर रखकर करते हैं उनकी यह हरक़त दीपक तले अँधेरे की तरह ही लगती है ऐसा लगता है जैसे अपने ही देश में जीना दूभर हो रहा है एक तरफ धर्मवाद तो दूसरी तरफ क्षेत्रवाद तीसरी तरफ जातिवाद वास्तव में देखा जाए तो देश में ऐसा कुछ भी नहीं लेकिन धर्मवाद, क्षेत्रवाद, और जातिवाद भड़काने वाले कुछ तत्त्व समूचे राष्ट्र का माहौल खराब करने पर तुले हुए हैं धर्म, जात, क्षेत्र को राजनीति से जोड़कर अपना स्वार्थ सिद्ध करना ही इनका मकसद है
हम उस देश के वासी हैं जिस देश में राधा कृष्ण के अमर प्रेम की पूजा की जाती है आज उसी देश में धर्म के रखवाले प्रेम को अश्लीलता का नाम देकर अपने राजनितिक लाभ बटोरने के चक्कर में आये दिन जो मन करता है वही करने लगते हैं ऐसा उनके द्वारा किये गए कामो से ही पता चलता है यदि वे वास्तव में देश भक्त और धर्म भक्त हैं तो उन्हें अपनी बात कहने का कोई दूसरा तरीका निकालना चाहिए लेकिन सरेआम गुंडागर्दी करके वे खुद अपनी साख पर कुल्हाडी मारने का कम तो कर ही रहे हैं दूसरा देश में अराजकता और फैला रहे हैं वेलेंटाइन डे प्रेम का पर्व है और इस देश में सभी को इस पर्व को मनाने की स्वतन्त्रता है
14 फरवरी को बजेंगे रक्षाबंधन के गीत :- छतीसगढ़ में तो इन धर्म के रखवालों ने ऍफ़.एम्. रेडियो चेनलों के लिए निर्देश तक जारी कर दिए के वेलेंटाइन डे पर सिर्फ बजेंगे राखी के गीत यदि प्रेम भावना से प्रेरित गाने बजे तो ऍफ़.एम्. रेडियो चेनलों की खैर नहीं दूसरी और धर्मसेना ने पकड़े गए प्रेमी जोड़ों की शादी करवाने का फैसला किया है। शिवसेना के छतीसगढ़ प्रमुख धनंजय परिहार ने कहा है कि उनकी पार्टी इस पर्व का विरोध करेगी और इसके लिए होटलों, रेस्तराओं तथा शुभकामना पत्र बेचने वालों से कहा गया है कि इस दिन कोई विशेष कार्यक्रम आयोजित नहीं करें। परिहार ने कहा है कि 14 फरवरी को जगह-जगह रक्षा बंधन के गीत बजाए जाएंगे।
भाई बहन के लिए विशेष परिचय पत्र जारी हो :- वेलेंटाइन डे पर धर्म और संस्कारों के रखवालों द्वारा किये जा रहे विरोध प्रदर्शनों से 14 फरवरी को अपने घरों से भाई बहनों का भी एक साथ निकलना दूभर है दो साल पहले का एक बाकया याद आता है घटना मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर की है जब वेलेंटाइन डे के दिन सिविक सेंटर चौपाटी के पास से मोटर साइकिल पर गुजर रहे भाई बहन को वेलेंटाइन डे का विरोध करने वालों ने देख लिया और उन्हें रोका उनके लाख कहने पर भी वे भाई बहन हैं धर्म के रखवालों ने एक न सुनी और उन्हें प्रेमी युगल समझकर उनके साथ जमकर मारपीट की दोनों भाई बहन जब गंभीर रूप से घायल हो गए तो वे उन्हें छोड़ कर चले गए ऐसे में जब प्रशासन इन घटनाक्रमों पर रोक लगाने में पूरी तरह से नाकाम हो चुका है तो प्रशासन को विशेष तौर पर भाई बहनों के लिए परिचय पत्र जारी करने चाहिए ताकि धर्म के रखवालों प्रेमी युगल को पहचानने में आसानी हो
बहरहाल वेलेंटाइन डे पर विरोध का यह कोई पहला साल नहीं है हर साल धर्म और संस्कृति की रक्षा का बीडा उठाने वाले जागते हैं और इस पवित्र त्यौहार को कलंकित कर देते हैं इन पर लगाम कसने की बेहद ज़रुरत है लेकिन इससे पहले प्यार करने वालों ने ही छेद दी है श्री राम सेना के विरोध में चला पिंक चड्डी अभियान धर्म और संस्कृति के रखवालों को एक तमाचा तो जड़ ही दिया
प्यार और जिन्दगी का एक अनूठा ही रिश्ता है प्यार वो एहसास है जिससे कोई भी अछूता नहीं पर विडंम्बना तो यह है कि इसे अश्लीलता से जोड़ इसे बेवजह बदनाम किया जा रहा है हालाकि ये भी कोई नई बात नहीं सदियों से प्यार पर पहरे लगते रहे उसे अश्लीलता की चादर ओढाकर उसे बदनाम करने के प्रयास किये जाते रहे हैं लेकिन आज तक प्रेम को कोई बाँध न सका उसे कोई रोक न सका और न ही उसे कोई मार सका प्यार तो आज भी ज़िंदा है और हमेशा हमेशा रहेगा

February 10, 2009

खजुराहो : शास्त्रीय नृत्य समारोह २५ फरवरी से

<><><>(कमल सोनी)<><><> खजुराहो नृत्य समारोह आगामी २५ फरवरी से प्रारम्भ होगा इस बात की जानकारी जन संपर्क मंत्री लक्षमीकांत शर्मा ने दी गौरतलब है कि विगत तीन दशकों से प्रतिवर्ष खजुराहो में शास्त्रीय नृत्य समारोह का आयोजन संस्कृति विभाग द्वारा किया जाता है समारोह में भारतीय शास्त्रीय नृत्य परम्परा के बहुआयामी स्वरुप का समावेश किया जाता है ख़ास बात यह है कि इस समारोह में ख्यातिप्राप्त शास्त्रीय न्रत्य कलाकारों की भागीदारी रहती है समारोह २५ फरवरी से प्रारंभ होगा और ३ मार्च तक चलेगा इस दौरान प्रतिदिन शाम ७ बजे नृत्य सभाओं में ख्यातिप्राप्त शास्त्रीय न्रत्य कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे
समारोह में भाग लेने वाले शास्त्रीय नृत्य कलाकार पाँच वर्ष में एक बार ही भाग ले सकते हैं हलाकि इस नियम को बदलकर तीन वर्ष कराने का प्रस्ताव दिया गया है समारोह के लिए ऑनलाइन टिकट बिक्री की सुविधा नहीं है संसकृति मंत्री से हेमामालिनी द्वारा दो कलाकारों की सिफारिश पर उठे विवाद के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इस समारोह में भाग लेने वाले कलाकारों का निर्णय सिफ जूरी ही करती है इसमें किसी की सिफारिश का कोई सवाल ही नहीं

February 9, 2009

शुरू हुई शादियों की धूम - बाज़ारों में लौटी रौनक

<><><>(कमल सोनी)<><><> आगामी ११ फरवरी से पुनः शहनाइयों की गूँज शुरू होने वाली है गत १३ जनवरी को गुरू अस्त होने पर शादियाँ रुक गई थी १० फरवरी यानि कल पुनः गुरू उदय होने के साथ ही शहनाइयों की सुनाई देने लगेगी इस बार शादियों के लिए ११ फरवरी से २८ फरवरी तक ११ शुभ मुहूर्त है लेकिन इसके पश्चात मीन राशिः में सूर्य के आ जाने से १४ मार्च से १४ अप्रैल तक पुनः शादियाँ रुकी रहेंगी
११ फरवरी से २८ फरवरी तक ११ शुभ मुहूर्त :- ११ फरवरी से २८ फरवरी तक ११ शुभ मुहूर्त है जिनमें सात श्रेष्ठ और चार मध्यमं दोषपूर्ण मुहूर्त हैं साथ श्रेष्ठ मुहूर्तों में ११, १२, १७, १९, २२, २६ और २७ फरवरी तथा मध्यम दोषपूर्ण मुहूर्त में १३, १४, १५, २८ फरवरी के हैं
इस साल कम ही हैं विवाह मुहूर्त :- सामान्य तौर पर कार्तिक शुक्ल एकादशी ( देवा उठनी ग्यारस ) से विवाह प्रारंभ हो जाते हैं जो करीब आठ माह तक रहते है और देव शयनी ग्यारस के पहले तक चलते हैं लेकिन मलमास, शुक्र तथा गुरू के अस्त होने तथा सूर्या के धनु, और में राशिः में प्रवेश की वजह से इस साल विवाह मुहूर्त कम ही हैं वर्त्तमान में संवत २०६५ में मात्र ११ विवाह मुहूर्त ही बताये जा रहे हैं लेकिन पंडितों के अनुसार आगामी संवत २०६६ में ५५ विवाह मुहूर्त हैं
लौटी बाजारों की रौनक :- शादियों के लिए आये शुभ मुहूर्तों की दस्तक से मंदी के बीच बाज़ारों में रौनक भी लौट आई है ग्राहकों की भीड़ और अच्छी खरीदारी से बाज़ार पुनः गुलज़ार हो गए हैं इससे पूर्व रवीवार को पुष्य नक्षत्र के कारण लोगों ने जमकर खरीददारी की पुष्य नक्षत्र बेहद शुभ मुहूर्त माना जाता है और इस दिन खरीददारी करने के प्रथा रही है रवीवार को पुष्य नक्षत्र के कारण ऑटोमोबाइल, कपडा, ज्वेलरी, इलेक्ट्रिकल्स, सहित अन्य उत्पादों की जमकर खरीददारी हुई एक अनुमान के मुताबिक लगभग १५ से २० करोड़ का कारोबार हुआ है
दूसरी और वैवाहिक आयोजनों के चलते किराना, कपडा, इलेक्ट्रनिक, सोना चांदी, सौंदर्य प्रसाधन और बर्तन व्यावसाइयों में खासा उत्साह देखा जा रहा है व्यापारियों के अनुसार आगामी कुछ दिनों में बाज़ार में और भीड़ बढ़ने वाली है इसके मद्देनज़र उन्होंने ग्राहकों के लिए अलग alag व्हेरायाती और क्वालिटी के उत्पाद अपनी अपनी दुकानों में सजा रखे हैं

February 5, 2009

बेहद घातक हैं ब्रांडेड तेल

<><><>(कमल सोनी)<><><> भारत में ब्रांडेड और रिफाइन तेल तथा वनस्पति घी का चलन बेहद बढ़ गया है लेकिन क्या आप जानते हैं कि खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाले बाज़ार में उपलब्ध अनेक तेल ऐसे हैं जिनमें ट्रांस फ़ैट की मात्रा बहुत अधिक है. ट्रांस फ़ैट दिल के स्वास्थ्य के लिए घातक माना जाता है क्योंकि ये लाभदायक कॉलेस्टेरॉल की मात्रा घटा देता है. ये अध्ययन एक ग़ैर सरकारी संगठन सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरनमेंट (सीएसई) ने किया है.
बाज़ार में उपलब्ध ब्रांडेड और रिफाइन तेल तथा वनस्पति घी बेचने वाली कंपनियों के तमाम स्वास्थ्यवर्धक दावों, और विज्ञापनों की चकाचौंध में उपभोक्ता मंहगे और ब्रांडेड रिफाइन तेल तथा वनस्पति घी खरीद लेते हैं लेकिन इस बीच देशी घी और मक्खन का चलन भी कम हुआ है हाँ अज भी ऐसे परिवारों की कमी नहीं है जाना सिर्फ देसी घी और मक्खन का ही उपयोग होता है
सीएसई ने बाज़ार में उपलब्ध तेल, वनस्पति घी, मक्खन और घी बनाने वाली तीस कंपनियों के उत्पादों की जाँच के बाद पाया कि इन सभी उत्पादों में ट्रांस फ़ैट की मात्रा ज़रूरत से कई गुना अधिक है. ट्रांस फ़ैट एक असंतृप्त वसा है जो खाद्य तेल की जीवन अवधि बढ़ाने में सहायक होता है. रिपोर्ट के मुताबिक ट्रांस फ़ैट स्वास्थ्य के लिए घातक होता है, ख़ासकर दिल के लिए, क्योंकि ये लाभदायक कॉलेस्टेरॉल की मात्रा को कम कर देता है. इससे कैंसर और मधुमेह जैसी बीमारियाँ होने का ख़तरा बढ़ जाता है.
बीमारी :- सीएसई की जाँच में सभी ब्रांड के वनस्पति घी में ट्रांस फ़ैट की मात्रा डेनमार्क में स्थापित मानक के मुकाबले में पाँच से 12 गुना अधिक पाई गई. अध्ययन के अनुसार अगर डेनमार्क के मानक से तुलना की जाए तो भारत में किसी भी खाद्य तेल के स्वास्थ्य के लिए सही होने के बारे दावा नहीं किया जा सकता है दुनिया के कई देश खाद्य तेल में ट्रांस फ़ैट के इस्तेमाल की निगरानी करते हैं और भारत में भी खाद्य पदार्थों की निगरानी करने वाली संस्था ने ट्रांस फ़ैट को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताया है. वर्ष 2004 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने ट्रांस फ़ैट के मानक को तय करने पर विचार करना शुरु किया और वर्ष 2008 में सेंटर कमेटी फ़ॉर फूड को इस सिलसिले में एक प्रस्ताव भी भेजा था लेकिन इस पर फ़ैसला लिया जाना अभी भी बाक़ी है. अध्ययन के अनुसार ट्रांस फ़ैट की मात्रा सबसे अधिक वनस्पति घी और फिर वनस्पति तेल में है जबकि इसकी सबसे कम मात्रा घी और मक्खन में पाई जाती है.
सबसे घातक :-
राग ऑयल - २३.३१ फीसदी ट्रांस फ़ैट
पनघट तेल - २३.७ फीसदी ट्रांस फ़ैट
रथ वनस्पति - १५.९ फीसदी ट्रांस फ़ैट
गगन वनस्पति - १४.८३ फीसदी ट्रांस फ़ैट
जिंदल वनस्पति १३.७६ फीसदी ट्रांस फ़ैट
डालडा वनस्पति - ९.४ फीसदी
धारा सरसों तेल - १ फीसदी ट्रांस फ़ैट
सोयाबीन (फोर्च्यून, नेचर फ्रेश, व् जैमनी ) - १.५ फीसदी ट्रांस फ़ैट
अमूल मक्खन - ३.७ फीसदी ट्रांस फ़ैट
अध्यन के अनुसार सीएसई का यह कहना है कि यह तय कर पाना मुश्किल है कि कौन सा तेल सेहत के लिए अच्छा है
शुद्ध घी बनाम रिफाइन आयल :- यदि आप अपनी सेहत के लिए फिक्रमंद हैं और नहीं चाहते कि अपने और अपने परिवार के किसी सदस्य को दिल की बीमारी हो तो शुद्ध घी और मक्खन ज़्यादा बेहतर विकल्प है

February 3, 2009

फरवरी आई प्यार और खुशी के इज़हार के दिन लाई

<><><>(कमल सोनी)<><><> "मेरे प्यार की वो हद पूछते हैं, दिल में है कितनी जगह पूछते है, चाहते है हम उन्हीं को क्यों इतना, इसकी भी वो वजह पूछते है''। किसी शायर द्वारा किसी खास के लिए बयां यह पंक्तियां कहीं न कहीं आपके दिल से भी जुड़ी होंगी। तो अपने किसी खास को उसके खास होने की वजह बताने के लिए दिन शुरू हो गए है। शायद तभी तो लवर्स बेसब्री से फरवरी का इंतजार करते है। प्यार के इजहार की बात हो, या नए दोस्त बनाने की बात, किसी की तारीफ करनी हो या कोई उपहार देना हो, फरवरी का हर दिन परफेक्ट है। हर दिन कुछ खास है और हर दिन नई उमंग है। यंगस्टर्स की भी मानें तो उन्होंने डायरी में पहले ही फरवरी के हर दिन को नोट कर लिया है। एमबीए स्टूडेट आकाश शर्मा कहते है कि वैसे तो दोस्ती या प्यार का इजहार कभी भी किया जा सकता है लेकिन फिर भी फरवरी को लेकर यंगस्टर्स में कुछ खास ही उमंग होती है।
फरवरी का हर दिन ये कहता है
4 फरवरी-सुपर वेडनस डे, 5 फरवरी-प्रोमिस डे, 6 फरवरी-कांप्लीमेंट डे, 7 फरवरी-रोज डे, 8 फरवरी-स्माइल डे, 9 फरवरी-स्लेप डे, 10 फरवरी-अंब्रेला डे, 11 फरवरी- किस डे, 12 फरवरी- चकलेट डे, 13 फरवरी-फ्रेंडशिप डे/मेक ए न्यू फ्रेंड डे, 14 फरवरी-वेलेंटाइन डे, 15 फरवरी-थैंक्स फर बीइंग वेलेंटाइन डे, 16 फरवरी-हग डे, 22 फरवरी-टैडीबियर डे

February 2, 2009

घट गए वनक्षेत्र - मैली हो गई पुण्यसलिला माँ नर्मदा

<><><>(कमल सोनी)<><><> मध्यप्रदेश की जीवनदायनी और धार्मिक महत्व रखने वाली नर्मदा नदी अब प्रदूषित हो गई है चिंता की बात तो यह है कि नर्मदा अपने उदगम स्थल अमरकंटक में ही सबसे ज़्यादा मैली हो गई है मध्यप्रदेश प्रदूषण निवारण मंडल की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक पुण्य दायनी नर्मदा अब मैली हो गई है और यदि अभी इसके प्रदूषण मुक्त करने के प्रयास नहीं किया गए तो आगे इसके और भी अधिक मैली होने की संभावना है रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया है कि अपने उदगम स्थान से रेवा सागर संगम तक के लगभग १२५० किमी के सफ़र में नर्मदा नदी का जल यदि सबसे ज़्यादा प्रदूषित है धार्मिक घाटों पर साथ ही शैरोन का प्रदूषित जल भी नर्मदा में प्रवाहित किया जाता है
क्या कारण हैं प्रदूषण के ? :- पुण्य सलिला सौंदर्य नदी नर्मदा अपने घटते वन क्षेत्र, बांधों का निर्माण, कीटनाशक युक्त पानी के बहाव, शैरोन की नालियों का गंदा पानी नर्मदा में बहाना इत्यादि अनेक कारण हैं जिससे नर्मदा मैली हो गई है लेकिन इनमें सबसे बड़ा कारण है धार्मिक कारण जो मध्यप्रदेश प्रदूषण निवारण मंडल की ताज़ा रिपोर्ट को सही ठहराता है वह है प्रतिदिन नर्मदा में बहाई जाने वाली पूजन सामाग्री, लोग अपने घरों से पूजा के बाद के अवशेष नर्मदा में लाकर बहा देते हैं साथ ही प्रतिदिन नर्मदा स्नान और उसमें कपडे धोना जानवरों को नहलाना इत्यादि अनेकों कारण नर्मदा को प्रदूषित कर रहे हैं
नर्मदा को सौंदर्य की नदी कहा जाता है यही मुख्य वजह है कि इसके तटों ख़ास तौर पर अमरकंटक और भेडाघाट जबलपुर में देशी विदेशी पर्यटकों का जमावडा लगा रहता है पर्यटन का केंद्र होने की वजह से नर्मदा के प्रसिद्द घाटों के आसपास कई होटलों श्रंखला है जिनका गंदा पानी भी नर्मदा में बहाया जाता है
साथ ही नर्मदा नदी में स्वयं को साफ़ करने की क्षमता भी कम हुई है मध्यप्रदेश प्रदूषण निवारण मंडल के अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि नर्मदा में एक प्रकार का जीव पाया जाता है पत्थरों को जोड़ता है पानी को फिल्टर करता है यह प्रकृति का ही एक स्वरुप है जिससे नदियाँ स्वयं को स्वच्छ रखती हैं लेकिन पिछले कुछ सालों में इसमें कमी के चलते नर्मदा में स्वयं को स्वच्छ करने की क्षमता में भी कमी आई है
सौन्दर्य नदी नर्मदा :- नर्मदा अन्य नदियों के अलावा अपने दोनों तटों पर बेहद सौंदर्य समेटे हुए है सघन वन क्षेत्र और पथरीली वादियों से प्रवाहित नर्मदा के अलग अलग रूप देखने को मिलते हैं कहीं अपने शांत प्रवाह में असीम गंभीरता का परिचय देती तो कहीं गर्जना के साथ अपना प्रचंड रूप भी दिखाती पत्थरों की सीना चीरती, बड़े बड़े जल प्रपात बनाती हुई निरंतर आगे बढ़ने का ज्ञान भी देती है
सदियों से कई साहित्यकारों और कवियों ने नर्मदा के सौंदर्य से प्रभावित होकर उसे अपनी लेखनी का माध्यम बनाया
घट गए वन्य क्षेत्र, गिर गया जल स्तर :- कभी नर्मदा के दोनों तटों पर सघन वन्य क्षेत्र हुआ करते थे इसका प्रमाण कलचुरी वंश और उससे पहले के समय के एइतिहसिक तथ्य देते हैं पौराणिक नदी नर्मदा के वन्य क्षेत्र बेहद घट गए हैं साथ ही उसका जल स्तर भी निरंतर घट रहा है
क्या है नर्मदा का धार्मिक महत्व ? :- यूं तो नर्मदा के धार्मिक महत्व से सभी परिचित हैं धार्मिक पुराणों में नर्मदा को तीर्थ संजोयानी कहा गया नर्मदा के धार्मिक महत्व का वर्णन हमें हिन्दू धर्म के पौराणिक ग्रंथों जैसे शिवमहापुराण, नारद पुराण, स्कंध पुराण के रेवाखंड, महाभारत, और नर्मदा पुराण में मिलते हैं नर्मदा पुराण स्कंध पुराण के रेवा खंड से ही लिया गया है नर्मदा के १०८ नामों में से एक नाम है शांकरी इसका वर्णन शिव महापुराण में मिलता है यही वजह है कि नर्मदा में पाए जाने वाला हर पत्थर भगवान शिव का रूप माना जाता है पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गंगा स्नान से जो पुण्य लाभ मिलता है वही पुण्य लाभ नर्मदा दर्शन से मिलता है हालाकिं इससे गंगा का महत्व कम नहीं होता लेकिन ऐसा सिर्फ इसीलिये है कि शास्त्रों में गंगा को श्रेष्ठ और नर्मदा को ज्येष्ठ नदी माना गया है
क्या हों प्रयास ? :- कुछ समय पूर्व चौकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर में ओमती नाला जो कि शहर का सबसे बड़ा नाला है लेकिन किसे ज़माने में यह ओमती नदी के नाम से प्रचलित था अंग्रेजों के शासन काल में भी लिखे गए लेखों में ओमती नदी का ही वर्णन है
यदि आज नर्मदा को बचाने की मुहिम न छेड़ी गई तो वह दिन दूर नहीं जब या तो नर्मदा पूरी तरह से प्रदूषित हो जायेगी अपितु उसका अस्तित्व भी खतरे में पड़ जायेगा मध्यप्रदेश की जीवनदायनी पुण्यसलिला नर्मदा को स्वच्छ रखने में धार्मिक, सामाजिक, राजनितिक और प्रशासनिक सभी के सहयोग की आवश्यकता है साथ ही ज़रुरत है आमजनमानस में नर्मदा महत्व और आगामी भविष्य में नर्मदा की ज़रुरत को प्रसारित कर जागरुक बनाया जाय ताकि लोग स्वतः ही इसे प्रदूषित करने से परहेज़ करें