February 27, 2010

खेलें इको फ्रेंडली होली........(होली विशेष)



(कमल सोनी)>>>> यदि आप इस बार होली को किसी नए अंदाज़ में सेलीब्रेट करना चाहते हैं. तो रंगों के इस त्यौहार को इको फ्रेंडली बनायें. होली ऐसी हो जिसमें ज्यादा से ज़्यादा प्राकृतिक रंगों का प्रयोग हो. सबसे ज्यादा अप होली को तभी इंजॉय कर सकेंगे जब वह सूखी होगी. इससे आप जल सरंक्षण भी कर सकते हैं. गौर करें गर्मी की दस्तक होली से ही प्रारम्भ होती है. साथ ही गर्मी की दस्तक के पहले ही जलस्तर गिरावट आने लगती है जो कि एक चिंता का विषय है. इसके फलस्वरूप पानी में रंग मिलाकर हजारों लीटर पानी बर्बाद कर देने से पानी की समस्या और विकराल हो सकती है. पानी की कमी को देखते हुए लोगों को चाहिए कि वह सूखी होली खेलें. इस तरह वह जल संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. हालांकि कई सामाजिक संस्थाएं और आमजन इस दिशा में लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं. पानी की बर्बादी रोकने के लिए सबको मिल-जुलकर प्रयास करने होंगे. वर्तमान जलसंकट को देखते हुए लोगों को होली की उमंग भारी पड़ सकती है एक अनुमान के मुताबिक उमंग व उल्लास के साथ रंगों से सराबोर होकर होली मनाने पर एक शहर में एक दिन में 1 करोड़ 52 लाख 57 हजार 946 लीटर पानी अतिरिक्त खर्च होता है. होली खेलने वालों ने अगर प्राकृतिक रंग या गुलाल से होली खेली तो कुल 36 लाख 95 हजार 518 लीटर पानी की बचत होगी. आज भी कुछ लोग हैं जो प्रकृति से प्राप्त फूल-पत्तियों व जड़ी-बूटियों से रंग बना कर होली खेलते हैं. उनके अनुसार इन रंगों में सात्विकता होती है और ये किसी भी तरह से हानिकारक नहीं होते. विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य तौर पर नहाने में 20 लीटर पानी प्रतिदिन प्रति व्यक्ति खर्च होता है. सूखे रंग या गुलाल से होली खेलने के पश्चात 40 लीटर पानी खर्च होगा पर अगर यही होली कैमिकल युक्त रंगों से खेली जाती है तो रंग छुड़ाने व नहाने में 60 लीटर पानी की खपत होगी. साथ ही पानी मिले रंगों से जो पानी बर्बाद होगा वो अलग.

जल है तो कल है :- जल बचाने के लिए आमजनमानस को स्वयं विचार करना होगा. क्योंकि जल है तो कल है. हमें स्वयं इस बात पर गौर करना होगा कि रोजाना बिना सोचे समझे हम कितना पानी उपयोग में लाते हैं. यहाँ खास बात यह गौर करने लायक है कि आगामी २२ मार्च “विश्व जल दिवस” है. जी हाँ पानी बचाने के संकल्प का दिन. पानी के महत्व को जानने का दिन और पानी के संरक्षण के विषय में समय रहते सचेत होने का दिन. आँकड़े बताते हैं कि विश्व के १.४ अरब लोगों को पीने का शुद्ध पानी नही मिल रहा है. प्रकृति जीवनदायी संपदा जल हमें एक चक्र के रूप में प्रदान करती है, हम भी इस चक्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. चक्र को गतिमान रखना हमारी ज़िम्मेदारी है, चक्र के थमने का अर्थ है, हमारे जीवन का थम जाना. प्रकृति के ख़ज़ाने से हम जितना पानी लेते हैं, उसे वापस भी हमें ही लौटाना है. हम स्वयं पानी का निर्माण नहीं कर सकते अतः प्राकृतिक संसाधनों को दूषित न होने दें और पानी को व्यर्थ न गँवाएँ यह प्रण लेना आज के दिन बहुत आवश्यक है. यह दिवस हमें होली के दिन भी पानी बचाने का संदेश दे रहा है. आज हमें एक अहम सवाल खुद से पूछने की आवश्यकता है. कि क्या आप पूरा एक दिन बिना पानी के गुजारने की कल्पना कर सकते हैं ? जाहिर है नहीं. पानी अनमोल है, इसलिये संकल्प करें कि इस होली पर पानी बचाकर न सिर्फ़ आप अपने बल्कि समूचे विश्व को एक नए रंग में रंग देंगे.

मंडावा की सूखी होली की बात ही अलग :- मंडावा की सूखी होली में जयपुर, दिल्ली व बंबई ही नहीं विदेशों से भी सैलानी यहां आते हैं. यहां की होली में ना फुहड़पन, ना कीचड़, ना पानी और ना ही पक्का रंग, फिर भी रंग ऐसा चढ़े की छुटाए ना छूटे. चेहरे पर लगाया जाता है तो सिर्फ अबीर-गुलाल. पक्के रंग व पानी के प्रयोग पर पब्लिक का प्रतिबंध है. सूखी व शालीन होली की यह परंपरा करीब सौ साल से चली आ रही है. कुछ सालों से यहां होली पर पर्यटकों की संख्या भी बढ़ने लगी है.

स्वयं अपने घर पर बनायें प्राकृतिक रंग :- होली रंगों का त्योहार है जितने अधिक से अधिक रंग उतना ही आनन्द, लेकिन इस आनन्द को दोगुना भी किया जा सकता है प्राकृतिक रंगों से खेलकर, पर्यावरण मित्र रंगों के उपयोग द्वारा भी होली खेली जा सकती है और यह रंग घर पर ही बनाना एकदम आसान भी है. इन प्राकृतिक रंगों के उपयोग से न सिर्फ़ आपकी त्वचा को कोई खतरा नहीं होगा, परन्तु रासायनिक रंगों के इस्तेमाल न करने से कई प्रकार की बीमारियों से भी बचाव होता है.

ऐसे बनायें लाल रंग :-
<<*>> लाल गुलाब की पत्तियों को अखबार पर बिछाकर सुखा लें, उन सूखी पत्तियों को बारीक पीसकर लाल गुलाल के रूप में उपयोग कर सकते हैं जो कि खुशबूदार भी होगा.
<<*>> रक्तचन्दन (बड़ी गुमची) का पावडर भी गुलाल के रूप में उपयोग किया जा सकता है, यह चेहरे पर फ़ेसपैक के रूप में भी उपयोग होता है.
<<*>> रक्तचन्दन के दो चम्मच पावडर को पाँच लीटर पानी में उबालें और इस घोल को बीस लीटर के पानी में बड़ा घोल बना लें… यह एक सुगन्धित गाढ़ा लाल रंग होगा.
<<*>> लाल हिबिस्कस के फ़ूलों को छाया में सुखाकर उसका पावडर बना लें यह भी लाल रंग के विकल्प के रूप में उपयोग किया जा सकता है.
<<*>> लाल अनार के छिलकों को मजीठे के पेड़ की लकड़ी के साथ उबालकर भी सुन्दर लाल रंग प्राप्त किया जा सकता है.
<<*>> टमाटर और गाजर के रस को पानी में मिलाकर भी होली खेली जा सकती है.

पीला रंग :-
<<*>> दो चम्मच हल्दी को चार चम्मच बेसन के साथ मिलाकर उसे पीला गुलाल के रूप में उपयोग किया जा सकता है.
<<*>> अमलतास और गेंदे के फ़ूलों की पत्तियों को सुखाकर उसका पेस्ट अथवा गीला रंग बनाया जा सकता है.
<<*>> दो चम्मच हल्दी पावडर को दो लीटर पानी में उबालें, गाढ़ा पीला रंग बन जायेगा.
<<*>> दो लीटर पानी में 50 गेंदे के फ़ूलों को उबालने पर अच्छा पीला रंग प्राप्त होगा…

हरा रंग :-
<<*>> गुलमोहर, पालक, धनिया, पुदीना आदि की पत्तियों को सुखाकर और पीसकर हरे गुलाल के रूप में उपयोग किया जा सकता है.
<<*>> किसी भी आटे की बराबर मात्रा में हिना अथवा दूसरे हरे रंग मिलाकर भी हरे गुलाल के रूप में उपयोग किया जा सकता है.
<<*>> एक लीटर पानी में दो चम्मच मेहंदी को घोलने पर भी हरे रंग का प्राकृतिक विकल्प तैयार किया जा सकता है.

नीला :-
<<*>> एक लीटर गरम पानी में चुकन्दर को रात भर भिगोकर रखें और इस बैंगनी रंग को आवश्यकतानुसार गाढ़ा अथवा पतला किया जा सकता है.
<<*>> 15-20 प्याज़ के छिलकों को आधा लीटर पानी में उबालकर गुलाबी रंग प्राप्त किया जा सकता है.
<<*>> नीले गुलमोहर के फ़ूलों को सुखाकर उसके पावडर द्वारा तैयार घोल से भी अच्छा नीला रंग बनाया जा सकता है.
<<*>> नीले गुलमोहर की पत्तियों को सुखाकर बारीक पीसने पर नीला गुलाल भी बनाया जा सकता है.

भगवा रंग :-
<<*>> हल्दी पावडर और चन्दन पावडर को मिलाकर हल्का नारंगी पेस्ट बनाया जा सकता है.
<<*>> परम्परागत रूप से जंगलों में पाये जाने वाले टेसू के फ़ूलों को उबालकर भी नारंगी केसरिया रंग प्राप्त किया जाता है.

ऐसे खेलें होली :-
<<*>> अधिक से अधिक सूखे रंगों से होली खेलें, अधिक से अधिक प्राकृतिक रंगों से होली खेलें, आजकल प्राकृतिक रंग आसानी से बाजार में उपलब्ध होते हैं.
<<*>> होली खेलने से पहले पूरे शरीर और खासकर बालों पर अच्छी तरह से तेल मालिश कर लें या किसी लोशन का लेप लगा लें, इससे होली खेलने के बाद बालों और त्वचा का रंग छुड़ाने में आसानी होगी.
<<*>> होली खेलने से पहले नाखून को पॉलिश कर लें, ताकि होली खेलने के बाद भी वे वैसे ही चमकते हुए दिखेंगे और उसकी अधिक सफ़ाई नहीं करना पड़ेगी.
होली की शुभकामनाएं ..........

1 comment:

महेन्द्र मिश्र said...

तुम्हें खुदा महरूम रखे जिंदगी की हर बुराइयो से
रंगों का पर्वोत्सव मुबारक हो दिल की गहराइयों से
रंगोत्सव पर्व की हार्दिक शुभकामना और बधाई....