April 23, 2009

मध्यप्रदेश की १३ लोकसभा सीटों पर औसतन मात्र ४७.३% मतदान

१५ वीं लोकसभा के लियी आज दूसरे चरण में मध्यप्रदेश की २९ में से १३ लोकसभा क्षेत्रों में मतदान शाम ५ बजे संम्पन्न हुआ छुट पुट घटनाओं तथा कुछ जगहों पर चुनाव के बहिष्कार की घटनाओं को छोड़ मतदान आमतौर पर शांतिपूर्ण तरीके से संम्पन्न हुआ मुख्य चुनाव आयुक्त जे एस माथुर ने बताया कि मध्यप्रदेश की १३ लोकसभा सीटों पर औसतन ४७.३% मतदान हुआ है सबसे ज़्यादा मतदान छिंदवाडा लोकसभा क्षेत्र से था जहां मतदान का प्रतिशत ६३.३ रहा वहीं सबसे कम खजुराहो लोकसभा क्षेत्र में मतदान का प्रतिशत ४०.२ रहा कुल ४७.३% औसतन मतदान में पुरुषों का प्रतिशत ५२.२ तथा माहिलाओं का प्रतिशत ४१.८ रहा जिन १३ संसदीय क्षेत्रों में मतदान होगा उनमें खजुराहो, सतना, रीवा, सीधी, शहडोल, जबलपुर, मंडला, बालाघाट छिंदवाडा, होशंगाबाद, विदिशा, भोपाल, बैतूल शामिल हैं चुनाव आयोग ने कुल चार मतदान केन्द्रों त्योंथर, सिमरिया, नरता(उदयपुरा), रमखिरिया(उदयपुरा) में पुनः मतदान होने की संभावना जतायी है कटनी में पीठासीन अधिकारी ड्यूटी के दौरान शराब के नशे में पाए जाने पर उसे तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया


कहाँ कितना मतदान
बालाघाट - ५०.८%, बेतूल - ४४%, भोपाल - ४२.६%, छिंदवाडा - ६३.३%, होशंगाबाद - ४७.४%, जबलपुर - ४५.२%, खजुराहो - ४०.२%, मंडला - ४८.१%, रीवा - ४९.८%, सतना - ५०.७%, शहडोल - ४६.३%, सीधी - ४५.६%, विदिशा - ४३.२%


बहरहाल इन चुनावों में पूरे प्रदेश से चुनाव बहिष्कार की भी खबरें आती रहीं हैं चुनाव बहिष्कार की घटनाओं और मतदान के इस गिरते स्तर के बारे आप क्या कहना चाहेंगे ?

April 22, 2009

एक रिसर्च - दुनिया भर की मुख्य नदियों के जल स्तर में भारी गिरावट दर्ज

दुनिया भर की मुख्य नदियों के जल स्तर में गिरावट दर्ज की गई है एक अध्ययन में निकले निष्कर्षों के मुताबिक़ जलवायु परिवर्तन की वजह से नदियों का जल स्तर जल स्तर घाट रहा है और आगे इसके भयावह परिणाम सामने आएंगे अमेरिकन मीटियरॉलॉजिकल सोसाइटी की जलवायु से जुड़ी पत्रिका ने वर्ष 2004 तक, पिछले पचास वर्षों में दुनिया की 900 नदियों के जल स्तर का विश्लेषण किया है जिसमें यह तथ्य निकलकर आया है कि दुनिया की कुछ मुख्य नदियों का जल स्तर पिछले पचास वर्षों में गिर गया है यह अध्ययन अमेरिका में किया गया है अध्ययन के अनुसार इसकी प्रमुख वजह जलवायु परिवर्तन है पूरी दुनिया में सिर्फ़ आर्कटिक क्षेत्र में ही ऐसा बचा है जहाँ जल स्तर बढ़ा है और उसकी वजह है तेज़ी से बर्फ़ का पिघलना भारत में ब्रह्मपुत्र और चीन में यांगज़े नदियों का जल स्तर अभी भी काफ़ी ऊँचा है मगर चिंता ये है कि वहाँ भी ऊँचा जल स्तर हिमालय के पिघलते ग्लेशियरों की वजह से है. भारत की गंगा नदी भी गिरते जल स्तर से अछूती नहीं है उत्तरी चीन की ह्वांग हे नदी या पीली नदी और अमरीका की कोलोरेडो नदी दुनिया की अधिकतर जनसंख्या को पानी पहुँचाने वाली इन नदियों का जल स्तर तेज़ी से गिर रहा है अध्ययन में यह भी पता चला है कि दुनिया के समुद्रों में जो जल नदियों के माध्यम से पहुँच रहा है उसकी मात्रा भी लगातार कम हो रही है इसका मुख्य कारण नदियों पर बाँध बनाना तथा खेती के लिए नदियों का मुँह मोड़ना बताया जा रहा है लेकिन ज़्यादातर विशेषज्ञ और शोधकर्ता गिरते जल स्तर के लिए जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं उनका मानना है कि बढ़ते तापमान की वजह से वर्षा के क्रम में बदलाव आ रहा है और जल के भाप बनने की प्रक्रिया तेज़ हो रही है. मध्यप्रदेश की जीवनदायिनी नर्मदा का भी जल स्तर काफी तेज़ी से गिर रहा है जिसका मुख्य कारण नर्मदा के दोनों तटों पर घटते वन्य क्षेत्र और जलवायु परिवर्तन माना जा रहा है विशेषज्ञों ने प्राकृतिक जल स्रोतों की ऐसी क़मी पर चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा है कि दुनिया भर में लोगों को इसकी वजह से काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा. उनका कहना है कि जैसे जैसे भविष्य में ग्लेशियर या हिम पिघलकर ग़ायब होंगे इन नदियों का जल स्तर भी नीचे हो जाएगा.

April 18, 2009

फिर चले जूते - असम में कांग्रेसी सांसद पर चले जूते

फिर चले जूते लेकिन इस बार मामला कुछ और है इस बार न तो किसी पत्रकार ने किसी नेता पर जूता चलाया और न ही किसी पार्टी की किसी कार्यकर्ता ने अपनी नेता पर घटना असम की है जहाँ मतदाताओं ने सांसद पर जूते चलाये हैं असम के कौनबारी ग्राम में
नाराज मतदाताओं ने शुक्रवार को धुब्री लोकसभा सीट से कांग्रेस के मौजूदा सांसद पर जूते फेंके और पथराव कर दिया। सांसद अनवर हुसैन जब ग्राम के निकट गौरीपुर में एक चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे तो मतदाताओं ने उन्हें निशाना बनाया। मतदाता वहां एक
पुल का निर्माण करने का वादा नहीं निभाने को लेकर हुसैन से नाराज थे इसलिए उन्होंने सांसद पर जूते फेंके और पथराव किया। साथ ही वहां की जनता में इस बात से भी रोष व्याप्त था संसद सदस्य के तौर पर अपने पांच साल के कार्यकाल के दौरान वह एक बार भी
उनके क्षेत्र में नहीं आए थे।

April 17, 2009

इलेक्ट्रौनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की विश्वसनीयता संदेह के घेरे में


यूं तो चुनाव आते ही इलेक्ट्रौनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की विश्वसनीयता उसकी सत्यता और पारदर्शिता पर कई सवाल उठाये जाते रहे हैं इसी तारतम्य में एक बार फिर इलेक्ट्रौनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की विश्वसनीयता संदेह के घेरे में आ गई है लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है जब इलेक्ट्रौनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की विश्वसनीयता को लेकर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर में एक जनहित याचिका दायर की गई है जिसे माननीय न्यायालय ने विचारार्थ स्वीकार कर लिया गया है
याचिका कर्ता शेलेन्द्र प्रधान और अनिल चावला ने द्वारा प्रस्तुत याचिका में कहा गया है कि इलेक्ट्रौनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की कभी भी किसी निष्पक्ष एजेंसी द्वारा जाँच नहीं की गई है हालाकि इससे पूर्व वर्ष १९९० में इलेक्ट्रौनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की जांच के सम्बन्ध में विचार किया गया था याचिका कर्ता का कहना है कि विगत १९ वर्षों में एक बार भी इन इलेक्ट्रौनिक वोटिंग मशीन की जांच नहीं कराइ गई साथ ही याचिका कर्ताओं ने यह भी तर्क दिया है कि दो दशक पूर्व विकसित तकनीक को आज सुरक्षित और विश्वसनीय मानने का कोई तर्कसंगत या वैज्ञानिक आधार नहीं बनता साथ ही पिछले कुछ वर्षों में विकसित हुई हैकिंग तकनीकी भी सुरक्षित इलेक्ट्रौनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के लिए खतरा है
याचिका के साथ भोपाल के एक मतदान केंद्र के ग्यारह मतदाताओं के शपथ पत्र संलग्न किये गए हैं इन शपथ पत्रों में मतदाताओं ने कहा है कि २००८ के विधानसभा चुनाव में उन्होंने शैलेन्द्र प्रधान के पक्ष में मतदान किया था लेकिन शैलेन्द्र प्रधान को तीन ही वोट मिले यह ईवीएम की सत्यता पर एक सवालिया निशान है
वैज्ञानिकों की राय :- याचिकाकर्ताओं ने याचिका के साथ अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैज्ञानिकों टाडा युग्यिकोंदो, एडम्स स्टपल फील्ड, एवियल दी रुबिन, डेन एस वेलेच का वह शोध पत्र दाखिल किया है जिसमें यह दावा किया गया है कोई भी पूर्ण सुरक्षित ईवीएम मशीन नहीं बनाई जा सकती साथ ही विकसित देश और वैज्ञानिकों के कथन के अनुसार कोई भी मशीन पूरी तरह से त्रुटि रहित नहीं बनाई जा सकती वैज्ञानिकों का कहना है कि त्रुटी की संभावना चले एक लाख में एक हो या फिर १० लाख में एक लेकिन वह कभी शून्य नहीं हो सकती
कैसे होता है अन्य देशों में मतदान :- याचिका में कहा गया है कि विकसित देशों में विकसित देशों में वोटिंग मशीन में वोट डालने के बाद मतदाता के लिए यह सुनिश्चित कर लेने की व्यवस्था होती है कि कि उसका मत उसी प्रत्याशी को गया है जिसका उसने बटन दबाया है इसके लिए प्रत्येक मतदाता को वोटिंग मशीन से एक प्रिंट आउट मिलता है जिसमें उसके द्वारा चनित प्रत्याशी का नाम मुद्रित होता है मतदाता उसी प्रिंट आउट को एक अन्य मतपेटी में डाल देता है ऐसे में किसी भी असमंजस या विवाद की स्थिति में मतपेटी के आधार पर पुनः गणना की जा सकती है याचिका कर्ता के अनुसार भारत में मतदाता के पास यह जानने का कोई तरीका नहीं कि उसका मत उसी प्रत्याशी को गया है जिसका उसने बटन दबाया है
क्या है ईवीएम ? :- इलेक्ट्रौनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) जैसा की नाम से ही पता चलता है कि ऐसी मशीन जिसका प्रयोग मतदान के लिए होता है समय, पैसा और कर्मचारियों की बचत के उद्देश्य से देश में इलेक्ट्रौनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के ज़रिये मतदान प्रारंभ हुआ इलेक्ट्रौनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) मुख्यतः दो भाग में होती है पहला बैलेट यूनिट जहां मतदाता से समक्ष प्रत्याशियों के नाम उनका चुनाव चिन्ह और ठीक उसके बगल में एक बटन होता है जिसे दबाकर वह अपना पसंदीदा प्रत्याशी चुनता है दूसरा भाग कंट्रोल यूनिट होता है जिसका कंट्रोल पीठासीन अधिकारी के पास होता है इलेक्ट्रौनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) स्वतंत्र और बैटरी से संचालित होती है मशीन के कंट्रोल यूनिट पर एक रिजल्ट बटन होता जो की पूरी तरह से सील होता है मतदान संपन्न होने के बाद मतगणना स्थल पर इस रिजल्ट बटन को दबाकर परिणाम प्राप्त कर लिया जाता है आवश्यकता पड़ने पर परिणाम का प्रिंट आउट भी लिया जा सकता है
बहरहाल दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में इलेक्ट्रौनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की विश्वसनीयता उसकी सत्यता और पारदर्शिता के लिए कोई विशेष व्यवस्था भी आवश्यक है बार बार इलेक्ट्रौनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की विश्वसनीयता उसकी सत्यता और पारदर्शिता यदि सवालों के घेरे में आती है तो यह मतदाता पर भी नकारात्मक प्रभाव छोड़ती है इसी को दृष्टिगत रखते हुए मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग और मध्यप्रदेश मुख्य चुनाव अधिकारी तथा ईवीएम के निर्माताओं को इस सम्बन्ध में जवाब देने हेतु छेः सप्ताह का समय दिया है

April 16, 2009

बीजेपी के सिपाही ने आडवाणी पर फेंकी चप्पल

फिर चली चप्पल, मप्र के कटनी जिले में एक चुनावी सभा को संबोधित करने पहुंचे भाजपा के वरिष्ठ नेता और पीएम इन वेटिंग लालकृष्ण आडवाणी पर पार्टी के ही एक नाराज कार्यकर्ता ने चप्पल फेंक दी। कटनी में लाल कृष्ण आडवाणी की सभा के दौरान बीजेपी के कार्यकर्ता व कटनी जिले के पूर्व जिला अध्यक्ष पावस अग्रवाल ने पहले तो धक्का मुक्की की उसके बाद अपने साथ लाये लकडी के चप्पल आडवाणी पर फेंक दी हांलाकि यह चप्पल आडवाणी को नहीं लगी व् आडवानी इसके बाद सहज दिखे तथा इस घटना पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की चप्पल फेंकने वाले व्यक्ति को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है
गौरतलब है की इससे पूर्व भी हाल ही में जूता फेंकने की घटना गृह मंत्री पी. चिदंबरम के साथ हो चुकी है कांग्रेस ने इस घटना की निंदा की है
मप्र विधानसभा स्पीकर ईश्वर दास रोहाणी के साथ आडवाणी यहां एक चुनावी सभा को संबोधित करने पहुचें थे। इस घटना के बाद पूरे इलाके में अफरातफरी मच गई। पावस अग्रवाल ने कहा कि आडवाणी की कथनी और करनी में अंतर वे पार्टी के नीतियों और पार्टी के कार्यकलापों से कुछ दिनों से नाराज़ थे