January 28, 2009

लो अब पियो विटामिन वाली चाय ............!

<><><>(कमल सोनी)<><><> क्या आप चाय के शौकीन हैं ? तब तो यह ख़बर आपके लिए बेहद अच्छी है आपने हर्बल टी, आयुर्वेदिक टी, और भी तरह तरह की चाय के बारे में तो सुना ही होगा समय समय पर होने वाले शोधो और अनुसंधानों से चाय के फायदे और नुकसानों से भी आप परिचित होंगे लेकिन चाय की चुस्की के आनंद साथ चाय यदि सेहत के लिए भी लाभदायक हो तो क्या बात है ?
हिन्दुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड ने "ब्रुक ब्रोंड सेहतमंद" चाय का नया उत्पाद बाज़ार में उतारा है कम्पनी का दावा है कि यह चाय एक पौष्टिक चाय है क्योंकि इसमें है विटामिन, कार्बोहाइड्रेट का मिश्रण तो है न ये चाय के शौकीनों के लिए खुशखबरी
कैसे होगी विटामिन की पूर्ती :- भारत में 20 करोड़ से ज़्यादा लोग कुपोषण का शिकार हैं वास्तव में हमारी जनसंख्या का 60 प्रतिशत हिस्सा उपयुक्त मात्रा में विटामिन ना ले पाने के कारण विटामिन की कमी का शिकार है चूँकि लगभग 95 प्रतिशत लोग रोजाना चाय ज़रूर पीते हैं ऐसे में श्री में विटामिन पूर्ती का चाय सबसे अच्छा और आसन माध्यम है कंपनी का दावा है कि इस सेहतमंद चाय के तीन प्याले अनुशंसित आहार की पूर्ती करते है यानि हमारी रोजाना ज़रुरत का 50%
इस चाय के सम्बन्ध में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ डेवलपमेंट मेनेजमेंट के डॉ एस. के. त्रिवेदी ने कहा " कि कुपोषण से गंभीर नुकसान होते हैं और यह मानसिक और भौतिक विकास रोक देता है उन्होंने बताया कि हमारी 70% जनसंख्या माइक्रोन्यूट्रीएंट की रोजाना ज़रुरत को पूरा नहीं कर पाता उन्होंने बताया कि यह उत्पाद पूरे परिवार को दैनिक ज़रुरत में विटामिन की पूर्ती भी करेगा"
चाय तो हम सभी पीते ही हैं सुबह सुबह की चाय की चुस्की की क्या बात है और जब यह चुस्की विटामिन से भरपूर हो तो चाय का आनंद और सेहत के लिए भी फायदेमंद

January 27, 2009

गणतंत्र दिवस पर तिरंगे का अपमान - समयावधि पश्चात भी नहीं उतारा गया तिरंगा

<><><>(कमल सोनी)<><><> मल्हारगढ़ मंदसौर में भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा राष्ट्रीय ध्वज के नजदीक भाजपा का झंडा फहराए जाने से उपजा विवाद थमता इससे पूर्व ही रतलाम में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का अपमान का मामला प्रकाश में आ गया गणतंत्र दिवस पर जहां पूरा देश राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को सलामी दे रहा है वहीं तिरंगे के अपमान करने वालों के भी कमी नहीं है जिस तिरंगे की आन बान शान के लिए हमारे हजारों जवानो ने खुद को कुर्बान कर दिया आज फिर उसी तिरंगे को अपमानित कर राष्ट्रीय पर्व को शर्मसार कर दिया गया तिरंगे के अपमान के अकेले रतलाम में ही दो मामले सामने आये हैं
पहला मामला रतलाम डिस्ट्रिक्ट कोर्ट का है जहां शाम हो जाने के बाद भी सम्मान पूर्वक राष्ट्रीय ध्वज नहीं उतारा गया लाइट्स ओन हो चुकी थी और सूर्यास्त के बाद भी तिरंगा लहरा रहा था तथा ख़ास बात तो यह है कि जिस तिरंगे को सुबह गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान फहराया गया था वह नहीं उतारा गया एक निजी समाचार चेनल के संवाददाता को पूरे घटना क्रम का जायजा लेते देखा गया तो चपरासी ने आनन् फानन में न्यायालय के इमारत पर प्रतिदिन फहराया जाने वाला राष्ट्रीय ध्वज उतार लिया जबकि गणतंत्र दिवस के समारोह में फहराया गया तिरंगा बाद में बिना किसी सम्मान के एक साधारण कपडे की तरह ही उतारा गया
रतलाम जिले का ही दूसरा मामला जो है वह है जिला कांग्रेस कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) कार्यालय का जहाँ राष्ट्रीय ध्वज, ध्वज दंड पर न फहराकर एक बांस पर ही फहरा दिया गया इतना ही नहीं शाम को करीब सात बजे इसे ऑफिस के मकान मालिक के लड़के ने बड़े ही अपमानित ढुंग से उतारा
क्या कहती है ध्वज संहिता ? :- ध्वज संहिता के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा सूर्योदय पूर्व फहराया नहीं जा सकता और साथ ही उसे सूर्यास्त पूर्व उतारा जाना चाहिए वह भी पूरे गार्ड ऑफ़ ओनर और पूरे राष्ट्रीय सम्मान के साथ लेकिन शासकीय कार्यालयों में इसे महज़ एक दैनिक दिनचर्या का सामान्य सा काम या फिर महज़ एक औपचारिकता समझ कर कर दिया जाता है
बहरहाल राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का यह पहला मामला नहीं है इससे पूर्व भी राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के कई मामले प्रकाश में आये हैं ख़ास तौर पर जब गणतंत्र दिवस या फिर स्वतन्त्रता दिवस के शुभ अवसर हो तो ऐसे मामले राष्ट्र के गरिमा को भी फीका करते हैं ऐसे मामलों में यह भी प्रतीत होता है जैसे कि राष्ट्रीय पर्व पर महज खुद को देशभक्त दिखाने का खोखला अभिनय करने का कोई प्रयास किया गया हो लेकिन गौर करने के बात तो यह है राष्ट्र और आमजन के विकास के बात करने वाले जब हमारे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के ही सम्मान के प्रति समर्पित नहीं हो सकते तो देश के संविधान और राष्ट्र के विकास के प्रति अपना कितना समर्पण भाव रखते होंगे

January 24, 2009

आयकर विभाग के छापे के बाद नेताओं की नींद हराम - खुल सकती है बड़े बड़ों की पोल

<><><>(कमल सोनी)<><><> आयकर विभाग ने गुरूवार को मध्यप्रदेश के मंत्रियों के आयकर सलाहकारों के यहाँ ताबड़तोड़ छापे मारे छापे की कार्यवाही में छानबीन के दौरान कई ऐसे दस्तावेज़ मिले हैं जिनसे पता चलता है कि नेताओं और अफसरों ने किस कदर अपनी आय से अधिक निवेश किया है आयकर विभाग की इस छापामार कार्यवाही ने मंत्रियों और नेताओं की नींद हराम कर दी है आयकर विभाग के सूत्रों की माने तो छानबीन के दौरान मिले दस्तावेजों की आगे छानबीन करने पर भ्रष्टाचार से जुड़े ऐसे मामलों का भी खुलासा किया जा सकता है जो राजनेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत की और इशारा भी करता है
आयकर विभाग की इस छापामार कार्यवाही में आयकर सलाहकार मनोहरलाल चौरसिया के पुत्र बीमा एजेंट मनोज चौरसिया के घर से थोक में बीमा पोलिसियाँ ज़प्त की हैं जानकारी मिली है कि यह पोलिसियाँ प्रदेश के कुछ नेताओं और मंत्रियों की हैं पॉलिसियों के सम्बन्ध में चौकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि इनका प्रीमियम ५ से १० लाख रुपये सालाना है सीहोर में मनोहार लाल के दो बैंक लॉकर का भी पता चला है इन बैंक लॉकर को सील कर दिया है छापे में मनोहार लाल के रिश्तेदारों ने भी एक करोड़ रु की अघोषित आमदनी स्वीकारी है
कहाँ कहाँ पड़े छापे :- आयकर विभाग द्वारा गुरूवार को प्रारंभ हुई छापा मार कार्यवाही शुक्रवार को भी जारी रही इस बीच आयकर विभाग की अन्वेषण टीम ने आठ प्रतिष्ठानों पर सर्च और साथ प्रतिष्ठानों पर सर्वे कार्यवाही की आयकर विभाग ने भोपाल, विदिशा, गंजबासोदा, सीहोर और शुजालपुर ये छापे मारे थे
जिन लोगों के यहाँ छापे मारे गए उनमें आयकर सलाहकार, अनाज व्यापारी, ऐसे व्यापारी जिनके पास बड़ी कंपनियों की एजेंसियां तथा डीलर शिप हैं
छापे की खबर हो गई थी लीक :- आयकर विभाग के सूत्रों के अनुसार इस बात की आशंका व्यक्त की जा रही है कि विभाग की इस छापामार कार्यवाही की खबर पहले ही लीक हो गई थी जिससे जिस हिसाब से अघोषित संपत्ति की का पता चलना था वह नहीं चल सका लेकिन आयकर विभाग का यह मानना है कि जो दस्तावेज़ ज़प्त किये गए हैं वे भी बड़े बड़े खुलासे कर सकते हैं
बहरहाल आयकर विभाग की यह छापा मार कार्यवाही गत वर्ष उस समय हुई थी जब विधानसभा चुनाव होने वाले थे और अब इसे महज़ संयोग ही कहा जाय या कुछ और लेकिन इस बार कार्यवाही तब हुई है जब लोक सभा चुनाव बेहद नज़दीक हैं इससे पूर्व भी आयकर विभाग द्वारा लगातार कई छापामार कार्यवाही की गई हैं स्वस्थ्य विभाग के संचालक डॉ योगीराज शर्मा के यहाँ पड़े छापे में अधिकारियों और मंत्रियों की सांठ गाँठ का खुलासा भी हुआ था जिसकी परिणिति में डॉ. योगिराज शर्मा को जाना पड़ा अब देखना यह होगा कि आयकर विभाग के यह छापा मार कार्यवाही कौन से नए खुलासे करती है लेकिन इस छापामार कार्यवाही ने नेताओं, मंत्रियों और उनसे मिलीभगत करने वाले अधिकारीयों की नींद हराम कर दी है

January 22, 2009

अब दिल्ली के तर्ज़ पर भोपाल और इंदौर में भी चलेंगी मेट्रो रेल

<><><>(कमल सोनी)<><><> नई दिल्ली के तर्ज़ पर अब भोपाल और इंदौर में भी मेट्रो रेल चलेंगीं यदि सब कुछ ठीक ठाक चला तो तो आगामी ६-७ सालों में भोपाल और इंदौर वासियों को मेट्रो रेल की सौगात मिल जायेगी इस बात की जानकारी नगरीय प्रशासन तथा विकास मंत्री मध्यप्रदेश बाबूलाल गौर ने भोपाल में पत्रकारों से चर्चा के दौरान कही भोपाल और इंदौर में मेट्रो रेल चलाने के विचार के सात मंत्री बाबू लाल गौर विगत २० जनवरी को दिल्ली गए थे जहाँ उन्होंने मेट्रो रेल व्यवस्था का जायजा लिया साथ ही वे मेट्रो रेल मुख्यालय गए और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरशन के मेनेजिंग डाइरेक्टर तथा वहाँ के वरिष्ठ अधिकारियों से भेंट की
गौरतलब है कि कोच्ची और लुधियाना जैसे शहरों में मेट्रो रेल परियोजना प्रारंभ हो चुकी है भोपाल और इनडोर भी इसे श्रेने में आते हैं लिहाजा सरकार अब भोपा और इंदौर में मेट्रो रेल चलाने का प्रयास कर रही हैं
वैसे मेट्रो रेल उन स्थानों पर सफल मानी जाती हैं जहाँ की आबादी लगभग ३० लाख के आसपास होती है एक अनुमान के मुताबिक भोपाल की आबादी १८ से २० लाख के बीच वहीं इनडोर की आबादी ३०० लाख के आसपास है मेट्रो रेल परियोजना का काम शुरू होने के बाद इसे पूर्ण होने में ६-७ साल का समय लगता है लिहाजा तब तक भोपाल की बाडी भी तीस लाख के आसपास पहुँचने का अनुमान है दूसरी और इंदौर की आबादी ३० लाख होने से मेट्रो रेल पहले इंदौर में शुरू होने की संभावना व्यक्त की जा रही है
कितना होगा खर्चा :- परियोजना प्रारंभ होने के बाद १२००० करोड़ का खर्चा आएगा और परियोजना लगभग ६-७ सालों में पूरी हो जायेगी ६५ किलोमीटर का सफर तय करेगी जो मेट्रो इंटरसिटी की तरह चलेगी मेट्रो रेल में भोपाल और इंदौर के लिए पृथक पृथक से मेट्रो रेल कंपनी बनाई जायेगी
बहरहाल मेट्रो परियोजना के प्रारंभ हो जाने पर जहाँ एक और भोपाल और इंदौर अंतर्राष्ट्रीय परिद्रश्य में नई पहचान मिलेगी तो दूसरी और प्रदेश में औधोगिक निवेश की संभावनाएं बढेंगी लेकिन अब देखना यह होगा कि १२०० करोड़ की इस परियोजना को कब मजूरी मिलेगी और कब इसका काम शुरू हो पायेगा

मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री नरोत्तम के नाम के ख़त ने मचाई सनसनी - भ्रष्टाचार की कहानी मंत्री की जुबानी

<><><>(कमल सोनी)<><><>मध्यप्रदेश सरकार के मंत्रियों पर हमेशा से ही भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं और इस बात का खुलासा भी समय समय पर होता ही रहा है अभी भी कई मंत्रियों पर लोकायुक्त में भ्रष्टाचार के मामले लंबित हैं लेकिन इन दिनों अगर कुछ सुर्खियों में है तो वो है पिछली सरकार में मंत्री रहे नरोत्तम मिश्रा के नाम का वो ख़त जिसमें पूर्व मंत्रियों के भ्रष्टाचार में लिप्त होने का खुलासा किया गया है लेकिन ख़ास बात तो यह है भ्रष्टाचारी मंत्रियों की इस सूची में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री का नाम भी शामिल किया गया हैं
विधानसभा चुनावों में जनता ने भले ही भ्रष्टाचार का मुद्दा ना स्वीकारा हो लेकिन प्रदेश को एक स्वच्छ और ईमानदार सरकार देने का वादा करने वाले शिवराज सिंह ख़ुद भ्रष्ट मंत्रियों को मंत्री मंडल से बाहर का रास्ता दिखा पाने में असमर्थ रहे हैं किंतु उनकी नकेल कसने में कामयाब अवश्य हो रहे हैं अगर चिट्ठी पर यकीन करें तो पिछली सरकार में मंत्री रहे नरोत्तम मिश्रा के नाम के इस ख़त में मंत्रियों के भ्रष्टाचार की तथ्यात्मक जानकारी पार्टी आलाकमान को लिखी गई है हालाकि अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है के यह ख़त निवृतमान मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने ही लिखा है यह भी सम्भव है कि किसी ने राजनैतिक विद्वेष के चलते नरोत्तम मिश्रा को कोई हानि पहुंचाने के उद्देश्य से यह ख़त लिखा हो
कौन कौन हैं सूची में :- निवृतमान मंत्री नरोत्तम मिश्रा के नाम के इस सनसनीखेज़ ख़त में भ्रष्ट मंत्रियों की सूची में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह, बाबूलाल गौर, राघव जी जयंत मलैया, गोपाल भार्गव, कैलाश विजयवर्गीय, अनूप मिश्रा, जगदीश देवडा, लक्ष्मीकांत शर्मा, तुकोजीराव पवार, जगन्नाथ सिंह, डॉ. राम कृष्ण कुसमारिया, गौरीशंकर बिसेन, नागेन्द्र सिंह, और अर्चना चिटनिस के नाम शामिल हैं इतना ही नहीं इन भ्रष्ट मंत्रियों की सूची में सचिवालय के अधिकारियों और उनकी मंत्रियों के साथ मिली भगत को भी शामिल किया गया हैं निवृतमान मंत्री नरोत्तम मिश्रा के नाम से लिखे गए इस पत्र में सूची में शामिल सभी मंत्रियों पर कमीशन लेकर टेंडर पास कराना, या फ़िर पैसे लेकर कोई काम स्वीकृत कराना, मंत्रियों के सम्पत्ती के ब्यौरे तथा अधिकारियों से वसूली का लेखा जोखा तक शामिल हैं
क्यों लिखा ख़त :- पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के नाम के इस ख़त "मेरे खुले पत्र की पृष्ठ भूमि" में जिन विचारों को अभिव्यक्त किया गया है उनसे यह तो साफ़ जाहिर है कि ख़त लिखने वाला प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह से खफा हैं ख़त में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह पर धोखा देने का आरोप लगाया है ख़त में लिखा है कि "शिवराज सिंह ने मुझे मंत्रीमंडल में शामिल करने का वादा किया था मेने जब पूछा कि कौन सा विभाग मिलेगा तो उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास मंत्रालय" ......... वास्तव में नरोत्तम मिश्रा के नाम का यह ख़त शिवराज मंत्री मंडल में जगह न मिल पाने के कारण से ही लिखा गया प्रतीत होता है
पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के नाम का यह ख़त भाजपा की ओर से पी.एम् इन वेटिंग लाल कृष्ण आडवाणी और पार्टी आलाकमान को लिखा गया था और इस ख़त के माध्यम से किसी तरह से अपने मन की भडास निकालने का पूरा प्रयास किया गया है
बहरहाल अभी तक इस बात की पुष्टि तो नहीं हुई कि यह ख़त मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने ही लिखा है जबकि नरोत्तम मिश्रा स्वयं इस चिट्ठी की बात को नकार चुके हैं क्योंकि इस ख़त में जहाँ प्रदेश के ऊँचे कद के नेताओं और मंत्रियों के काले कारनामों का तथ्यात्मक लेखा जोखा है अब सवाल यह उठता है कि यह चिट्ठी पूर्व मंत्री ने नहीं लिखी तो फिर साजिश में कौन शामिल है ? किसने यह ख़त लिखा ? चाल चरित्र और चेहरे के बात करने वाली बीजेपी की किरकिरी अवश्य हो रही है. क्योंकि सरकार के ही भ्रष्टाचार की कहानी मंत्री की जुबान से निकल कर आ रही है लेकिन मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री नरोत्तम के नाम के यह ख़त राजनितिक गलियारों, अधिकारी वर्ग में तथा मीडिया में कौतुहल और चर्चा का विषय बना हुआ है बहरहाल अभी तक इस बात की पुष्टि तो नहीं हुई कि यह ख़त मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने ही लिखा है जबकि नरोत्तम मिश्रा स्वयं इस चिट्ठी की बात को नकार चुके हैं इनसाईट टीवी को मिले इस ख़त से तो यही जाहिर होता है कि यह किसी न किसी राजनैतिक विद्वेष का ही नतीजा है लेकिन इससे सता के गलियारों में बैठे राजनेताओं में कुर्सी के लिए आपसी खेंचतान का भी पता चलता है